रामकृष्ण  परमहंस  की  पूरी  कहानी -ramkrishan paramhans ki puri kahani

रामकृष्ण परमहंस की पूरी कहानी -ramkrishan paramhans ki puri kahani





रामकृष्ण परमहंस की पूरी कहानी – ramkrishan paramhans ki puri kahani   राम कृष्ण परमहंस माँ काली के परम उपासक थे जब भी याद करते माँ काली उनको दर्शन दे कर उनकी हर एक मानो कामना पूरी करती थी ,लेकिन उनके मन में एक शंका थी ,ये यही भगति हैं या इसके आगे और भी कुछ हैं ,क्या अपने आराध्य के दर्शन हो जाना ही पूर्णता हैं या इसके आगे कुछ और भी हैं ,यु ही दिन बीतते गए . एक दिन उनको गाँव में एक संत पधारे जिनका नाम तोता पूरी था , वो बहुत ही प्रसिद्ध ,आतम ज्ञानी थे .

राम कृष्ण परम हंस ने भी उनका नाम सुना था ,उनकी चर्चा बहुत सुनी आज एक बार देख न पड़ेगा यही विचार मन में लेकर परमहंस जी उनके पास चले गए .परमहंस जे ने उनको अपनी कहानी सुना दी के उनको माँ के दर्शन होते हैं एहि पुराण भगति हैं या इसके आगे भी और हैं .तो तोता पूरी जी बोले ,ये तो कुछ भी नहीं इसके आगे एक बहुत विशाल समुन्दर हैं .जिसको पार करना आसान भी नहीं हैं और अगर मन में ठान लिया तो मुश्किल भी नहीं हैं .

ramkrishan paramhans ki puri kahani
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राम कृष्ण परम हंस जी ने कहाँ के मै भी समाधि का आनद लेना चाहता हूँ लेकिन जब भी आंख बंद करता हूँ तो माँ की मूर्त सामने आ जाती हैं .छह क्र भी मै इन्हे भुला नहीं पता हूँ क्यों के माँ मेरी रोम रोम में बस चुकी हैं .ये सुनकर तोता पूरी जी बोले अगर नहीं होता तो भूल जाओ समाधि को भूलना तो तुमको ही हैं.

रामकृष्ण ने कहा मेरी सहायता करें। मुझ अकेले से न हो सकेगा। मैं तो आंख बंद करता हूं कि काली सामने खड़ी हो जाती है। मैं तो सब कुछ भूल जाता हूं।माँ की मूरत में खो जाता हूँ । मुझे तो द्वैत बना ही रहता है- भक्त का और भगवान का। अद्वैत घटता ही नहीं।

तोतापुरी ने कहा मैं एक काम करूंगा। तू आंख बंद करके बैठ और जैसे ही मैं देखूंगा कि खड़ी हो गई प्रतिमा और द्वैत उठने लगा और काली की प्रतिमा, तेरी आराध्य की प्रतिमा सामने आ गयी, मैं आवाज दूंगा-रामकृष्ण उठा तलवार, कर दे दो टुकड़े! तो फिर देर मत करना, उठा लेना तलवार और कर लेना दो टुकड़े।

रामकृष्ण जैसे अदभुत व्यक्ति ने भी पूछा लेकिन तलवार कहां से लाऊंगा? *तोतापुरी ने कहा : जहाँ से काली मैया लाया है? यह भी तेरी कल्पना है । कल्पना करने से यह माँ काली खड़ी हो गई है। जिस कल्पना से काली को लाया हैं उसी कल्पना से तलवार भी ले आना .

मगर रामकृष्ण ने कहा काली मां को तलवार से काट दूं! इससे तो खुद ही मर जाना पसंद करूंगा। तोतापुरी ने कहा : फिर तेरी मर्जी। मगर यह करना ही होगा। अगर तू समाधि में जाना चाहता हैं तो यह काली को छोड़ ही देना होगा।   तेरी आराध्य,  तेरी पूजा और प्रार्थना,  तेरी भक्ति अर्चना, यही बाधा है।यही तेरे मार्ग की सबसे बड़ी रुकाबट हैं ,इसको पार करना ही हैं तुझे अगर आनद में उतरना हैं तो

 

जैसे ही परमहंस जी ने आंखे बंद करते माँ काली सामने ,उन्ही के रूप में खो जाते अपने गुरु की बात भूल जाते के गुरु ने तलवार से काटने को बोला हैं .ऐसा अनेको बार हुआ हर बार गुरु जी समझते के जैसे ही दिखे तलवार से काट देना ,लेकिन परमहंस जी भूल जाते .वो तो अपने माँ के रूप को निहारते रहते .




तोता पूरी जी बोले के मै अब आखरी उपाए करूँगा क्यों के कल मुझे यहाँ से प्रस्थान करना हैं .अगर हो गया तो ठीक अन्यथा तुम्हरी मर्ज़ी .परमहंस जी ने सोचा के काली माँ की आराधना वर्षो तक की उनको तलवार से एक पल में कैसे काट दू .कितने भजन गए कितने ,कीर्तन किये ,काली माँ मिलने के लिए कितने आंसू बहाये थे अब उनको एक पल में काट देना आसान नहीं हैं …

लेकिन तोता पूरी जैसा गुरुमिलना आसान नहीं हैं फिर न जाने कब मुलाकात हो या न हो .अंत में राम कृष्ण जी ने हिम्मत बांध कर सोचा के अबकी बार काट दूंगा .

तोता पूरी जी बोले अगर अब त्यार हैं तो आंखे बंद कर लेना ,मै भी ध्यान में बैठ जाऊंगा जैसे ही तुम काली माँ के रूप में मगन होने लगोगे मै तुम्हारे माथे पर किसी नुकीली बस्तु से काट दूंगा लेकिन तुम आंखे मत खोलना ,तलवार उठाना और काट देना कर देना टुकड़े .

तोता पूरी जी ने समीप पड़े हुए एक कांच के टुकड़े को उठा लिया और परम हंस जी ने आंखे बंद कर ली जैसे ही परम हंस जी ने आंखे बंद की माँ काली सामने दर्शन दे रही थी .तोता पूरी जी ने ध्यान में देखा भगत फिर डोल रहा हैं .उन्होंने कांच के टुकड़े से परमहंस जी के माथे पर एक छोटा का कट का निशान लगा दिया.

जैसे ही उनके माथे पर चोट लगी परमहंस जी को याद आ गया के इनको तो काटना हैं ,परमहंस जी ने तलवार उठायी और काट दी माँ काली की मूरत . काट दी अपने मन की कल्पना .अब परमहंस जी पहुँच गए सीधा समाधि में कई घंटे बीत गए समाधि में .जब होश आया तो आनद में नहाये हुए थे .




अपने गुरु के चरणों में कोटि कोटि नमन किया और उनका धन्यबाद किया .

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