राजा राम मोहन राय की जीवनी – raja ram mohan ray biography in hindi

राजा राम मोहन राय की जीवनी – raja ram mohan ray biography in hindi




राजा राम मोहन राय की  जीवनी raja ram mohan ray biography in hindi राजा राम मोहन राय 18 शताब्दी के बहुत बड़े समाज सुधारक थे उन्होंने बाल विवाह , सती प्रथा और पर्दा प्रथा के विरुद्ध खुल कर आवाज लगाई 1828 में, ram mohan ray ने कलकत्ता में brahman  समाज को एकजुट किया, बे जाति प्रतिबंधों के खिलाफ थे ,1831 में mughal सम्राट अकबर द्वितीय ने उन्हें राजा की उपाधि दी

राजा राम मोहन राय की जीवनी
राजा राम मोहन राय की जीवनी

राजा राम मोहन राय की जीवनी :-

जन्म :- 14 अगस्त, 1774
जन्म स्थान : राधानगर गांव, हुगली जिला, बंगाल प्रेसीडेंसी (अब पश्चिम बंगाल)

माता पिता :- तारिणी देवी एवं
पत्नी : उमा देवी (तीसरी पत्नी)
पुत्र : राधाप्रसाद और रामप्रसाद
शिक्षा: पटना में फारसी और उर्दू; वाराणसी में संस्कृत; कोलकाता में अंग्रेजी
आंदोलन: बंगाल पुनर्जागरण
धार्मिक दृष्टिकोण: हिंदू धर्म (प्रारंभिक जीवन) और ब्रह्मांड (बाद में जीवन में)

मृत्यु: 27 सितंबर, 1833
मौत का स्थान: ब्रिस्टल, इंग्लैंड




प्रारम्भिक जीवन :-

raja ram mohan ray के पिता एक अमीर ब्राहण थे ,जो धार्मिक रीती रिवाजो का पालन करना अपना कर्तव्य समझते थे .पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानो के बीच राजा राम मोहन राय का बचपन बीता raja ram mohan ray 14 साल की उम्र में सन्यांस लेना चाहते थे लेकिन उनको अपनी माता जी की आज्ञा नहीं मिली.

mohan ray  की शादी नो वर्ष की उम्र में कर दी गयी परन्तु शादी के कुछ days बाद उसकी पत्नी की मृत्यु हो गयी ,फिर १० साल की उम्र में फिर से उनका विवाह किया गया दूसरी शादी से उनको दो पुत्र प्राप्त हुए और कुछ वर्षो बाद उनकी दूसरी पत्नी की भी मृत्यु हो गयी .1826 उन्होंने तीसरी शादी की .

राजा मोहन जी शिक्षा और ज्ञान के धनी थे उन्होंने बहुत सी language  सीखी , बंगाली , संस्कृत .urdu ,अरबी , इंग्लिश ,इस सभी भाषाओँ को सिखने के लिए उनके पिता रमाकांत रॉय ने प्रेरित किया था अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी में क्लर्क की नौकरी मिल गयी शुरआत में उनको रंगपुर के कलेक्टर श्री जॉन डिगबी के साथ काम किया ,उसके बाद उनकी permotion हुयी उन्हें दीवान की उपाधि दे गयी. अब उनका कार्य सरकार के राजस्व एकत्रित करना था .

परन्तु उनको ये नौकरी पसंद नहीं आयी वो तो समाज को सुधारने के लिए इस धरा पर आए थे अध्यात्म और एक एकेश्वर बाद के सिद्धांत को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने east इंडिया की job छोड़ दी.अब उनके जीवन का मकसद भारत को अंग्रेजो के कुशाशन से आज़ादी दिलाना और समाज में अंधविश्वास और कुरीतिओं को खत्म करना था




मोहन राय धर्म के नाम पर आडम्बर और मूर्ति पूजा के विरोधी थे उन्होंने उपनिषदों और शाश्त्रो का हवाला देकर समाज को समझाया के इश्वर एक है और सती प्रथा शास्त्रों के विरुद्ध है , ईस्ट INDIA के समय reporters  को कोई आज़ादी प्राप्त नहीं थी ,अखबारों को प्रकाशित करने से पहले उसके विषय पर सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती थी ,इस बात का राजा मोहन राय ने पुरजोर विरोध किया और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए कई काम किये

उन्होंने बांग्ला , संस्कृत और फ़ारसी ,और HINDI भाषा में कई प्रकाशन और सम्पादन किये जिनमे miratul अखवार ,सम्बाद कौमुदी ,बंगदूत जैसे कई अखवरपार्कशीट किये जो लोगो द्वारा पसंद किये जाते थे ,इन प्रकाशनो के जरिए वो समाज को नयी दिशा देने का कार्य करते थे महिला शशक्ति कर्ण के लिए उन्होंने कई महान कार्य किये .

1830 में मुग़ल सम्राट ने इन्हे रॉयल्टी बढ़ाने और सती प्रथा के कानून को बदलने के लिए इंग्लैंड भेजा ,३ साल बाद २७ सितंबर 1833 को वहीँ उनकी मृत्यु हो गयी उनकी समाधि ब्रिस्टल में अर्नोस वेले कब्रिस्तान में बनाई गयी ,ब्रिटिश सरकार ने उनको सम्मान देने के लिए कुछ वर्ष पहले ब्रिस्टल में एक सड़क का नाम raja ram mohan राय way रखा है .




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