कंस के हाथों मारे गए देवकी के छ: बच्चे पिछले जनम में कौन थे-rahasyamay katha in hindi

कंस के हाथों मारे गए देवकी के छ: बच्चे पिछले जनम में कौन थे-rahasyamay katha in hindi




rahasyamay katha in hindi –1)-

कहते है कभी किसी देवता , ईश्वर या ब्रह्म ज्ञानी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए ,इसकी सजा इंसान को कई जन्मो तक भुगतनी पड़ सकती है , कुछ लोग पुनर्जन्म को मानते है और कई लोग इसका उपहास उड़ाते है , महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन बहुत दुखी रहता था उसको हमेशा अभिमन्यु की याद आती थी ,उसने कृष्ण से कहा भगवन आप तो अन्तर्यामी हो .

rahasyamay katha in hindi
rahasyamay katha in hindi

आप मेरी एक इच्छा पूरी कर दो मुझे के बार अभिमन्यु से मिला दो मैं उसको एक बार देखना चाहता हु श्री कृष्ण जी ने कहा अर्जुन जब तक अभिमन्यु जीवित था वो तेरा पुत्र था लेकिन मृत्यु के बाद तेरा उसका कोई नाता नहीं वो जहा है बहुत आनंद से है ,उसको बापिस बुलाना  सृष्टि के नियम के विरुद्ध है ,

परन्तु अर्जुन अपनी जिद पर अड़ा रहा उसने कहा सिर्फ एक बार मिला दो फिर आप जैसा कहोगे बैसा ही करूँगा .
अर्जुन भगवन कृष्ण का प्रिय भगत था इस लिए कृष्ण जी ने उसकी बात मान ली  श्री कृष्ण जी पांडवो  और द्रोपदी को  एकांत स्थान में ले गए अर्द रात्रि में भगवन श्री कृष्ण जी ने अपनी योग माया से अभिमन्यु को बुलाया , जब अभिमन्यु सामने प्रकट हुआ तो अर्जुन जोर जोर से रोने लगा और बोला मेरे पुत्र अभिमन्यु मेरे पुत्र अभिमन्यु .

अभिमन्यु ने अर्जुन से कहा कौन तुम्हारा पुत्र अब मैं तुम्हारा पुत्र नहीं मेरे और तुम्हारे लाखों जनम हो चुके है कई बार तुम मेरे पुत्र बने और कई बार मैं तुम्हारा पुत्र बना ,ये सभी रिश्ते तभी तक होते है जब तक हम धरती में शरीर धारण किये रहते है जब शरीर छोड़ दिया सब रिश्ते नाते ख़तम .अभिमन्यु की बातें सुन कर अर्जुन का मोह भांग हो गया .फिर कृष्ण ने अभिमन्यु को उसके लोक में बापिस भेज दिया .


 

rahasyamay katha in hindi — 2)-

जैसा की अपने ऊपर पढ़ा कभी किसी देवता या ईश्वर की हंसी नहीं उड़ानी चाहिए ,यही गलती की थी देवकी के छ पुत्रों ने अपने पिछले जनम में , एक बार ब्रह्मा जी के दरवार में सभी ऋषि मुनि बैठे थे.

उनमे महा ऋषि मरीचि के छः पुत्र भी उपस्थित थे ,ब्रह्मा जी की किसी बात को सुन कर वो हसने लगे ,तो ब्रह्मा जी ने उनको श्राप दे दिया , और कहा के तुम यहाँ रहने योग्य नहीं हो तुम सभी भाई मृत्यु लोक में जाकर राक्षश कुल में जनम लो .

वही ऋषि बालक ब्रह्मा जी के श्राप से कालनेमि के छ: पुत्र बनकर इस धरती पर जनम लिए ; उसके बाद फिर हिरण्यकशिपु के घर जनम लिया , छः बालको को अपना पिछले जनम याद था के किस कारन उनको बार  दैत्ये कुल में जनम मिल रहा है .




इस से मुक्ति पाने का बिचार उनके मन में आया परन्तु उनको डर था के इस जनम के पिता हरिण्यकशिपु उनको ईश्वर की भगति करने की आज्ञा नहीं देंगे , फिर भी उन्होंने अपने राज्य से दूर जाकर ब्रह्मा जी की तपस्या करना आरम्भ कर दी , बहुत समय उपरांत ब्रह्मा जी उनके सामने प्रकट हुए और कहा .

तुम मेरे पौत्र थे लेकिन अपने कू कर्मो के कारन तुम राक्षश योनि में भटक रहे हो अब मैं .तुम्हारी भगति से प्रसन हूँ तुम अभीष्ट बार मांगो सभी बालक मन ही मन प्रसन होते हुए बोले .जितने भी देवता है .मानव दानव , सिद्धेश्वर है उन सब से हम अवध्य हो जाएँ . अभीष्ट बर देकर ब्रह्मा जी अंतर् ध्यान हो गए.

जब हरिण्यकशिपु को इस बात की जानकारी मिली के उसके पुत्र ब्रह्मा जी से बर प्राप्त कर लिए है तो उसको जलन होने लगी , उसने अपने छ पुत्रों से कहा तुमने मेरी भगति छोड़ कर ब्रम्हा की भगति की है ,मेरे जैसे बल शाली पिता के होये हुए तुमने ब्रह्मा को प्रसन करने की जो गलती की है

इस फलसवरूप मैं तुम्हारा त्याग करता हूँ  ,तुम सभी पाताल में चले जाओ .वहां तुम लोग कई वर्षो तक नींद के आवेश में रहोगे .उसके बाद बारी बारी तुम्हारा जनम देवकी के गर्भ से होगा .पिछले जनम का तुम्हारा पिता कालनेमि कंस के रूप में जनम लेगा वही तुम्हारा बद्ध करेगा .

इस तरह से वही बालक कई जन्मो तक दानव कुल में जनम लेकर फिर देवकी के छ पुत्र के रूप में जनम लिए ,जनम लेते ही   कंस उनका बद्ध  कर देता था .
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