chronic fatigue syndrome hindi -क्रोनिक फटीग सिंड्रोम

chronic fatigue syndrome hindi -क्रोनिक फटीग सिंड्रोम





chronic fatigue syndrome hindi क्रोनिक फटीग सिंड्रोम chronic fatigue syndrome kya hota hai आपकी उम्र अगर 40 वर्ष से ऊपर हो रही है तो आपमें इस रोग के लक्षण दिखना सामान्य बात है ,सीएफएस के मुख्य लक्षण शरीर में बहुत ज्यादा थकान होना आप जितना भी आराम कर लो ये थकान कम नहीं होगी ,इसके कारणों का पता नहीं लगाया जा सकता क्यों के इसके लिए अभी तक एलोपैथी में कोई सुबिधा उपलब्ध नहीं है .इस आर्टिकल में आपको क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण लक्षण और उपचार का सिंपल तरीका बताया जायेगा , अगर आपको अच्छे लगे तो यूज़ करें.chronic fatigue syndrome hindi





क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का निदान और लक्षण  —

अगर आपको छ: महीने से लगातार थकान महसूस हो रही है ,जिसको सामन्य भाषा में कहे तो अगर आपका बदन टूटने जैसा महसूस हो और इसके साथ निम्न लक्षण भी दिखे तो समझ लें आप क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का शिकार हो चुके है
१– भूलने की आदत स्मरण शक्ति कमजोर होना या थोड़ा सा दिमागी काम करने पर आपके बदन में थकावट महसूस होना .
२– नींद आने में परेशानी ,
३.– जोड़ो का दर्द
४–मस्कुलर पेन
५— गले में खिरखिरी होना
६– सर दर्द होना या आंखे भारी रहना .

अगर आपको इनमे से चार या अधिक लक्षण एक साथ महसूस हो रहे है तो ये सीएफएस की पुष्टि करता ,लेकिन अगर कोई एक लक्षण है तो इसका हरगिज़ अर्थ न निकाले के आप क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के पेशंट है .


कई वार समान्य बुखार या वायरल इंफेक्शन होने के बाद भी ये लक्षण दीखते है जो कुछ महीनो बाद अपने आप ठीक भी हो जाते है ,कुछ विशेषज्ञों का मानना है के ये रोग वायरस के कारन होता है .अभी ये सिर्फ कल्पना है .इसका अर्थ ,डॉक्टर भी आपको सिर्फ उलझा सकते है और अंत में सिर्फ पेन किलर और कुछ विटामिन दे कर पीछा छुड़ा लेते है.




कारन —

जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है हमारे शरीर में रस धातुओं की कमी होने लगती है ,इसको एलोपैथी में हॉर्मोन इम्बैलेंस कहते है ,ये सबसे बड़ा कारन है सीएफएस का लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी.के यही एक कारन है या इसके पीछे कुछ भी है जिसको अभी खोजना है .

रस धातुओं की कमी होने पर प्रतिरोधक शक्ति भी कम होने लगती है जिस से थोड़ा सा परिश्रम ,मानसिक या शारीरिक करने पर थकान शुरू हो जाती है ,आराम करने को मन करता है लेकिन रात भर सोने के बाद सुबह उठते हो तो भी थकान बानी रहती है


क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का उपचार :–

एलोपैथी में इसका अभी तक कोई भी उपचार नहीं है आपको कुछ दर्द निवारक दवाइयां और एक दो टॉनिक दे दिए जाते है

ये रोग ज्यादा तर उन लोगो को होता है जो एक जगह अधिक देर तक बैठ कर दिमाग को थकने वाला कोई जॉब करते है .या किसी किस्म की स्ट्रेस में जीते है ,

सबसे पहले आपको एक काम करना है कुछ दिनों के लिए अपने काम से छुट्टी लेकर आराम करें या किसी हिल स्टेशन में चले जाये.

इस रोग में सैर करना बहुत जरुरी है शुरुआत में धीरे धीरे सैर करें बाद में अपनी गति बढ़ाते जाएँ.

कुछ योगासन या घरेलु व्यायाम भी लाभदायक होता है , ये आपको नियमित करना चाहिए




क्रोनिक फटीग सिंड्रोम  का वैदिक उपचार

अगर आपकी उम्र 40 या 50 हो गयी है तो आपको समझ जाना चाहिए के आपने अपनी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा खो दिया वो अब बापिस नहीं आएगा ,लेकिन जो समय बचा है उसका सही उपयोग करें .

इस रोग के लक्षणों को मन से निकालने के लिए आप ध्यान करें ध्यान करने से आपके मस्तिष्क में सेराटोनिन और मेलाटोनिन नाम के हार्मोन का सतुलन ठीक हो जाता है जिस से शरीर में हल्कापन महसूस होता है .मन प्रसन रहता है अंदर से एक अलग प्रकार की ख़ुशी मिलती है, और आपका सारा आलस और थकान ख़तम हो जाती है ,

अगर आप सोने से पहले आधा घंटा ध्यान करते है तो आपको 12 घंटे तक नींद आ सकती है सुबह उठने पर आपकी थकान ठीक हो जाती है .

सुबह 10 – से 12 बजे की की धूप सेकने से भी थकान और आलास ख़तम हो जाता है गर्मिओं में डायरेक्ट धूप में न बैठे लेकिन ऐसा काम जरूर करे जिस से आपका पसीना निकले ,पसीना निकालने से भी ये रोग ठीक हो जाता है .अधिक गर्मी में पसीना निकलना और मेहनत से पसीना निकालना दोनों में अंतर् को समझ कर कार्य करें.

 




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