Bastille day in hindi : बैस्टिल दिवस क्या है और फ्रेंच इसे क्यों मनाते हैं

By | July 13, 2018

बैस्टिल डे 14 जुलाई Bastille day [2018 ] : Bastille day kyu manaya jata hai :  Bastille day in hindi  me pade ..14 जुलाई फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस है , भारत में जिस जोश और ख़ुशी के साथ दिवाली का पवित्र त्यौहार मनाया जाता है उसी तरह फ्रांस में भी १४ जुलाई का दिन बहुत खुशिओं और हर्षो उल्हास के साथ मनाया जाता है ,Bastille day in hindi

कैसे मनाया जाता बैस्टिल डे है :- 

इस दिन फ्रांस में बहुत से लोग बड़े पैमाने पर सार्वजनिक उत्सव में भाग लेते हैं। सुबह सुबह सैन्य और नागरिक परेड होती है ,उसके बाद सांस्कृतिक कार्य हैं  सांप्रदायिक भोजन किया जाता है ,, नृत्य, पार्टियां और ,शाम के समय एफिल टावर के पास शानदार आतिशबाजी प्रदर्शित की जाती हैं ,



14 जुलाई की सुबह पेरिस में एक बड़ी सैन्य परेड है। सैन्य स्कूलों, फ्रेंच नौसेना और फ्रेंच विदेश सेना के कैडेट समेत विभिन्न इकाइयों की सेवा पुरुषों और महिलाओं परेड में भाग लेते हैं। पेरिस फायर ब्रिगेड के साथ परेड समाप्त होता है। परेड के दौरान परेड मार्ग पर सैन्य विमान उड़ता है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति परेड शुरुआत करते है और सैनिकों की समीक्षा करते है और हजारों लोग मार्ग पर  मार्च करते हैं। अन्य लोग  परिवार और करीबी दोस्तों के साथ  जश्न मनाने वाला भोजन या पिकनिक करते हैं।

kya है बैस्टिल  :-

बैस्टिल एक किला था  जिसे सं 1370  में फ्रांस को  अंग्रेजों के आक्रमण से बचाने के लिए बनाया गया था . हालांकि, Bastille पेरिस में एक किले सेंट एंटोनी गेट पर स्थित था। इसका इस्तेमाल शस्त्रागार और जेल के रूप में भी किया जाता था। बैस्टिल किले में आठ टावर थे, जो की 73 फीट ऊंचे और छह फीट मोटे थे। प्रत्येक टावर का अलग अलग नाम रखा गया था .

  1. कॉर्नर टॉवर
  2. चैपल टॉवर
  3. ट्रेजरी टॉवर
  4. काउंटी टॉवर
  5. वेल टॉवर
  6. लिबर्टी टॉवर
  7. बर्टाउडेर टॉवर
  8. बेसिनेर टॉवर

हर एक टावर की अपनी कहानी और अलग इतिहास है  इस किला में १५ टोपे लगाई गयी थी .

 बैस्टिल डे क्यों मनाया जाता है :-

कहते है फ्रांस में 1789 में लुइस अष्ठम का राज था वो बहुत ही क्रूर राजा था जिसने अपनी प्रजा पर कई प्रकार के क्र लगा रखे थे ,खाने पिने की चीजें मांगी कर दी ,और जिसने इसके विरुद्ध आवाज़ उठायी उसे जेल में बंद कर के असहनीय यातनाये दी ,इन सब अत्याचार से तंग आ कर जनता भड़क गयी ,और उन्होंने विद्रोह करना शुरू कर दिया। जिसने एक क्रांति का रूप ले लिया लोग आज़ादी चाहते थे महंगाई से और क्रूर राजा के अत्याचारों से

30 जून, 1789 की रात को इस किले पर आक्रमण  की तयारी हो चुकी थी की कुछ बात थी। 12 जुलाई, 1789 की रात को शहर के लोग किले के चरों और फ़ैल गए गोला बारूद को बैस्टिल किले में स्थानांतरित कर दिया था। 14 जुलाई, 178 9 को क्रांतिकारियों द्वारा बैस्टिल पर हमला किया गया था। उस किले को तहस नहस कर दिया .




 

अंत भला सो सब भला :-

क्रांतिकारिओं ने राज तंत्र को ख़तम कर दिया ,बहां गणत्रंत की स्थापना की गयी ,लेकिन किले का रख रखाव बहुत खर्चीला था जिस कारन उस किलो को भी तोड़ दिया गया .इस क्रांति को बैस्टिल का तूफान भी कहा जाता है क्यों की सैंकड़ों वर्षो के राज घराने को एक ही दिन में उखाड़ फेंका गया , जिस तरह तूफ़ान में कोई पुराना वृक्ष उखड जाता है ,

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