शिवाजी महाराज,छत्रपती शिवाजी महाराज – 19 फरवरी 2018

शिवाजी महाराज,छत्रपती शिवाजी महाराज – 19 फरवरी 2018





शिवाजी महाराज





शिवाजी महाराज ,छत्रपती शिवाजी महाराज,   भारत की भूमि में अनेक वीरों और योद्धाओं का जनम हुआ ,छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान योद्धा थे दुशमन इनके नाम से थर थर कांपते थे ,इनका जन्म 19 फ़रवरी 1627  ई. को और मृत्यु  3 अप्रैल, 1680 ई. को हुई थी ,1674 में शिवा जी महाराज जी ने मराठा साम्राज्य की स्थापना की .1674 में शिवजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ और उन्हें छत्रपति की उपाधि मिली तब इन्हे छत्र पति शिवजी महाराज के नाम से जाना जाने लगा .महाराज जी के बारे में कुछ लिखना सूरज को दीपक दिखाने समान है ,जी ने अपने जीवन में इतने कहाँ काम किये ,जो किसी आम वियक्ति के बस की बात नहीं थी.

शिवाजी महाराज,छत्रपती शिवाजी महाराज – 19 फरवरी 2018

शेरनी का दूध लाना – जब शिवा जी अपने गुरु के आश्रम थे तब से ही इन्होने अपने शौर्य का परिचय देना शुरू कर दिया था , एक बार गुरु जी ने अपने सभी शिष्यों को बुला करा कहा के मेरे पैर में जखम हो गया है ,इसका इलाज़ सिर्फ शेरनी के दूध से हो सकता है ,आप में से जो मेरे उपचार के लिए शेरनी का दूध लेकर आएगा वो मेरा सबसे प्रिय शिष्य होगा ..सभी शिष्य अपने घर भाग गए

लेकिन शिवा जी महाराज जंगल की तरफ चले और तब कब तक बापिस नहीं लोटे जब तक शेरनी का दूध नहीं मिला ,उन्होंने शेरनी का दूध लेकर अपने गुरु जी को दिया तो गुरु जी ने शिवा जी महाराज को अपने गले लगाया और बोला अब तुम दूध लेकर आए तो खुद ही लगा दो मेरे जख्मो पर ,जब महाराज जी ने गुरु के जख्मो से पट्टी उतारी तो वहां कोई जखम नहीं था . तब गुरु जी ने बोला के ये सब मैंने तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए किया था ,

शिवा जी महाराज जी के अमूल्य बचन –

१…. महाराज जी का कहना था के राजा को पेड़ की तरह दयालु और सहनशील होना चाहिए जिस तरह पेड़ को पथर मारने पर फल गिरता है राजा को भी अपनी दयालुता का परिचय देना चाहिए.

२..अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पहले छोटा कदम बढ़ाओ ,

३… वो अपनी मात्र भूमि की सवतंत्रता के लिए कहते थे के सवतंत्रता सबका अधिकार है.

४.. शिवा जी महाराज जी ने कहा के अपना सर दुश्मनो के सामने कभी न झुकाओ.

५… छत्रपति शिवा जी महाराज  कहना था के अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सज्जनो और दुष्टों को बचन देकर अपने साथ मिला लो ,लेकिन लक्ष्य प्राप्त होने पर सिर्फ संत , महात्मा और सज्जनो को दिया हुआ बचन पूरा करो , दुष्टों को दिया हुआ बचन कभी पूरा न करो ,

६.. उन्होंने शारीरक बल के साथ आत्म बल को भी बढ़ाने की बात की , उनका कहना था के आत्म बल से ही विजय मिलती है.

७…शिवा जी महाराज साम दाम दंड भेद के ज्ञाता थे इस लिए उन्होंने कहा के दुशमन से बिना लड़े भी जीत सकते है.

८.. शिवा जी महाराज जी ने कहा के दूषण की सेना चाहे जितनी भी विशाल हो .सही और सटीक योजना बनाकर उनको हराया जा सकता है ,बिना योजना के लड़ा गया युद्ध हार का कारण बनता है.




९…उनका सबसे बड़ा उपदेश ये है के सबसे पहले राष्ट्र, फिर गुरु, उसके बाद माता -पिता, फिर परमेश्वर.इस से पता चलता है के वो कितने बड़े राष्ट्र भगत थे.

१०… अगर आपका होंसला बुलंद है तो आप पर्वत को भी तोड़ कर धुल में मिला सकते है.

 

 

Leave a Comment