वैदिक खगोल विज्ञानं के रहस्य (vaidik astronomy)

वैदिक खगोल विज्ञानं के रहस्य (vaidik astronomy)





वैदिक खगोल विज्ञानं के रहस्य (vaidik एस्ट्रोनॉमी)
भारत के लोगो को हजारो वर्ष पूर्व खगोल शाहस्तेर का ज्ञान था |आधुनिक वैज्ञानिक अपने एडवांस उपकरणों की सहायता से अंतरिक्ष को समझने का पर्यतन करते है |इसके विपरीत वैदिक खगोल विज्ञानं आज से हजारो वर्ष पूर्व अपनी चरम सीमा में था | मॉडर्न astronomy अंतरिक्ष के रहस्यों को

समझने में आज भी प्रयास कर रहा है | दूसरी और हमारे ऋषि मुनि नक्षत्रों ,ग्रहो , सूर्ये आदि का गहन अध्ययन किया था | आर्यभट्ट और भास्कराचार्य भारत के वैज्ञानिक हुए है जिन्होंने एस्ट्रोनॉमी को कई सिद्धांत दिए |

 

पृथ्वी सूर्ये की परिक्रमा करती है — > बहुत से विदेशी बुद्धिजीवी इस बात को स्वीकार नहीं करते थे ,
परन्तु हजारो वर्ष पहले वैदिक विज्ञानिको ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया था | वैदिक विगणिको ने ऋग्वेद के मंत्रो में लिखा है के पृथ्वी सूर्य के चारो और प्रदक्षिणा करती है .
(ऋग्वेद – १०.२२.१४ )
ऋग्वेद के एक और मंत्र में लिखा है के पृथ्वी सूर्ये की आकर्षण शक्ति दुआरा अपनी कक्षा में स्थिर है ,
(ऋग्वेद – ७.९९.३)
(ऋग्वेद -१०.१८९.१)
(यजुर्वेद – ३.६१)
(अथर्ववेद – ६.३१.१) में एक श्लोक है जिसका अर्थ है के पृथ्वी सूर्ये के चारो और घूमती है
आमं गौ: पृश्निरकृमिद असदन मातरं पुर :
पितृमं च प्रयन स्वः

पृथ्वी गोल है — कलयुग की कई सभ्यताओं का मानना था के पृथ्वी चपटी है ,जिसका खण्डन अरस्तु और पाइथागोरस ने अपने सिद्धांतो में किया था , लेकिन आज से हजारो वर्ष पुराण हमारे वैदिक खगोल शास्त्री भास्कराचार्य जी ने सिद्धांत शिरोमणि में समझाया था के ,पृथ्वी चारो और से चपटी दिखती है परन्तु ये गोल है | उनका इस बात को समझने का तरीका बिलकुल आसान था उन्होंने कहा
समो यतः स्यात्परिधेः शतांशः
पृथ्वी च पृथ्वी नितरां तनियान |
नरश्च त्तपरिषठ गतस्य कृत्स्ना
समेव तस्य प्रति भतयतह सा ||
उन्होंने कहा के यदि हम एक बहुत बड़े गोले के सोवें भाग को देखे तो वो हमे एक सीधी रेख दिखाई देगी उसी तरह हम हम पृथ्वी के बहुत छोटे से भाग को देखते है इस लिए ये हमे चपटी परतीत होती है

,सूर्य , चंद्र ग्रहण , गुरत्वाकर्षन सिद्धांत भी भारत में महर्षि पतंजलि दुआरा इसा से 150 वर्ष पूर्व उल्लेख किया गया है |

इन सब बातों से पता चलता है के ,वैदिक विज्ञानं अपने समय में कितना विकसित था