विश्व पर्यावरण दिवस – हमारी आने वाली पीढियां या तो ख़तम हो  जायेंगी

विश्व पर्यावरण दिवस – हमारी आने वाली पीढियां या तो ख़तम हो जायेंगी





विश्व पर्यावरण दिवस  पर्यावरण प्रदूषण संरक्षण – आज हमें पर्यावरण सरक्षण की चिंता सता रही है परन्तु पर्यावरण को जितना नुकसान मानव जाती ने पिछले 100 वर्षो में पहुँचाया है उसका नतीजा मानव जाती भविष्य में खुद भुगतेगी अगर आज भी हम न सुधरे तो हमारी आने वाली पीढियां या तो ख़तम होने के कगार पर पहुँच जायेंगी या विलुप्त हो जाएँगी .कुदरत ने मानव को विकसित  ( brain) दिया है but वही दिमाग इसके पतन का कारन भी है

save environment essay  in hindi
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भूमिका :-

आज से कुछ दशक पहले कई बुद्धिजीवी इकट्ठा हुए उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण  पर अपनी चिंता जाहिर की जिसका नतीजा 5 जनवरी 1974 को पर्यवरण संरक्षण दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया गया .ताकि blue planet  के प्राणी अपने आधार को सुरक्षित रख सकें लोगो में environment को सुरक्षित रखने की जागरूकता आ जाये .

महोदय मैं आपसे पूछना चाहता हूँ क्या साल में एक दिन स्कूलों कॉलेजों  सरकारी और गैर सरकारी सस्थानो में पर्यावरण सरक्षण पर भाषण देने मात्र से हमारे पर्यावरण की सुरक्षा हो जायेंगी ,या टेलीविजन पर महंगे एडवर्टाइजमेंट दिखाने से पर्यावरण सुरक्षित हो जायेगा ,

आज पुरे विश्व में 2,54,43,35,00,00,000-00 ( अनुमानित राशि ) रुपय पर्यावरण सुरक्षा की एडवर्टाइजमेंट में खर्च किया जाता है , अगर उसका 1 प्रतिशत भी पौधरोपण में खर्च किया होता तो आज विश्व पर्यावरण संकट से न जूझ रहा होता.

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पर्यावरण सरंक्षण क्यों जरुरी है :-

मानव , पशु पक्षी , वन्य animal या जलचर ,उन सभी के जीवन के लिए environment  की अहम् भूमिका है ,अगर पर्यावरण सुरक्षित है तो वे सभी सुरक्षित हैं अन्यथा धरती पर जीवन भूतकाल की बात हो जायेंगी सभी प्राणीओ को साफ़ हवा और पानी की आवश्यकता है . यदि ये मुख्य source  विषैले हो गए तो कई प्रकार की महामारी फैलने का खतरा रहता है



,हर वर्ष कोई न कोई नया रोग महामारी बन के सामने आ जाता है ,एबोला , निपाह ,डेंगू , स्वाइन फ्लू आदि जितने भी खतरनाक रोग है ये सब पर्यावरण प्रदूषण के कारन ही फैल रहे है ,हमारा वातावरण इतना ज्यादा विषैला हो चूका है जिसमे हर दिन नए virus पैदा हो जाते है .जो मानव के अस्तित्व को ख़तम करने की चुनौती देते है

ग्लोबल वार्मिंग का खतरा :-

environment  को नुकसान पहुँचाने से global warming का खतरा भी दिन प्रति दिन गंभीर विकराल रूप लेता नज़र आ रहा है .ग्लोबल वार्मिंग से दोहरा नुकसान होता है एक तो ग्लेशियर पिघल रहे है जिस कारण समुन्दर का जल स्तर बढ़ने लगा है जो देश या नगर समुंदर के किनारे बसे है वहाँ विनाशकारी बाढ़ अपना तांडव करती लाखो लोगों के आशियाने उजाड़ देती है और हजारों लोगो को मोत की neend सुला देती है .

ग्लोबल वार्मिंग से धरती के वातावरण में भी परिवर्तन हो रहा है कही सूखा तो कहीं बेमौसमी मूसलाधार बारिश तो कहीं बाढ़ ,और दूसरी जगहा 47 डिग्री की चिलचिलाती गर्मी से लोग मर रहे हैं .सर्दिओं में भयंकर सर्दी और summer में भयंकर गर्मी पर्यावरण की अनदेखी का फल हैं जो मानव को कुदरत की तरफ से मिल रहा हैं .

प्लास्टिक की चर्चा हम अगले संस्करण में करेंगे

पर्यावरण को नुकसान कैसे पहुंचा :-

पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने में जितने दोषी विकसित देश हैं उतने  ही दोषी विकासशील देश भी हैं ,हर कोई दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हजारों उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ रहा हैं आप जानते हैं जब कोई उप ग्रह अंतरिक्ष में भेजा जाता हैं तो वो ozone परत को छलनी कर देता हैं.

ozone :-

ओज़ोन परत धरती के ऊपर एक सुरक्षा कवच की तरह हैं जो पृथ्वी को सूरज से आने वाली प्राबैंगनी किरणों से बचाती हैं अगर इसी तरह राकेट और उपग्रह आस्मां में भेजे जाते रहे तो एक दिन ओज़ोन परत, नष्ट हो जायेंगी तब मानव का सारा विकास धरा का धरा रह जायेगा उस समय मानव और सभी प्राणीओ को कुदरत के कहर से कोई नहीं बचा सकता.

इनके इलावा खतरनाक हथयार और बम भी पर्यावरण को नष्ट करने में तुले हुए हैं ,इनके ब्लास्ट से वायु में विषैले कण बढ़ रहे हैं जो कैंसर और चर्म और स्वास सम्बन्धी कई रोगों को जनम देते ,first देश अगर second देश पर कोई बम फेंकता हैं तो इसका नुकसान दोनों को होता हैं जीत चाहे किसी की भी हो हार दोनों की होती हैं ,दूसरे में तवाही के निशान दिखते हैं और पहले देश में पर्यावरण दूषित हो जाता हैं.





prithvi  के पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने में मानव द्वारा फैलाया गया कचरा भी जिम्मेदार हैं ,अकेले INDIA के घरों से लाखो टन कचरा प्रति दिन निकाला जाता हैं ,या तो ये कचरा समुंदर में और नदिओं में फैंक दिया जाता हैं या शहर के पास ही कहीं डंप कर दिया जाता हैं अगर आप दिल्ली कभी घूमने गए हैं तो आपको वहां कचरे के ऊँचे ऊँचे पहाड़ देखने को मिल जायेंगे evrest की चोटियां भी उनके आगे बोनी नज़र आती हैं.

पर्यावरण को सुरक्षित कैसे रखना हैं ये आप मुझ से ज्यादा जानते हैं ,बस शुरुआत करने की देर हैं

जहा भी इस प्रकार के कचरे के ढेर हैं वहां से जहरीली गैसों का निकलना एक आम बात हैं जिनसे वायु और पर्यावरण दूषित हो रहा हैं ,नदिओं और समुंदर में फेंका गया कचरा pani  को दूषित कर रहा हैं manav अपने विनाश की तयारी अपने हाथों से कर रहा हैं ,वायु विषैली कर दी पानी जहरीला कर दिया पेड़ पौधे जो पर्यावरण को शुद्ध करने का काम करते हैं उनको काटने पर जोर दे रहा हैं .एक दिन ऐसा आएगा न सांस लेने को हवा रहेगी न पीने को pani और न ही इस धरती पर पेड़ पौधे होंगे .

शहरों की हर एक गली की नुक्कड़ में आपको कूड़े के dher मिल जायेंगे ,सभी संम्पन लोग वहां अपने घर का कूड़ा कचरा फेंकते हैं , जिनसे कई प्रकार के खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस उत्पन होते हैं जो फिर उन्ही संम्पन लोगो के घरों में जाते हैं और उनके सदस्यों को बीमार करते हैं ,किसी को डेंगू हो जाता हैं किसी को cancer तो किसी को कोई वायरस अपनी चपेट में ले लेता हैं .

पर्यावरण संरक्षण कैसे करें :-

विश्व के 143 देशों से प्रतिनिधि हर साल 5 जून को इकट्ठा हो के इस विषय पर चर्चा करते हैं सिर्फ चर्चा करते है ,विकास सबको चाहिए ,पर्यावरण का क्या है ये तो हो गयी ऊँचे दर्ज़े की बात ,

हम आम लोग हैं हम क्या प्रयास कर सकते हैं पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए .हमें इसकी शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए ,पहले तो अपने घर और आस पास की साफ़ सफाई का ख्याल रखना चाहिए ताकि गंदगी के कारन रोगाणु न पनपने पाएं ,उसके बाद हमें अपने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरण को नुक्सान नहीं पहुँचाना चाहिए ,वृक्ष पेड़ पोथे हमारे सच्चे मित्र है उनको काटना नहीं चाहिए .




विकास और बदलाब जरुरी है लेकिन हमें जलवायु का ध्यान रखते हुए आगे कदम बढ़ाना चाहिए ,उधोग और कारखाने से निकलने वाली गंदगी को नदिओं और जलाशयों में फेंकने से बचना चाहिए

2 thoughts on “विश्व पर्यावरण दिवस – हमारी आने वाली पीढियां या तो ख़तम हो जायेंगी

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन प्लास्टिक मुक्त समाज के संकल्प संग ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है…. आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी….. आभार…

    • धन्यवाद महोदय ,

      आपके बुलेटिन में पोस्ट का शामिल होना सम्मान की बात है

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