मानस पूजा कैसे करते  हैं – manas puja kaise karte hai

मानस पूजा कैसे करते हैं – manas puja kaise karte hai





मानस पूजा क्या होती है  शाश्त्रो में पूजा की कई बिधियाँ बताई गयी है जिनमे से एक है मानस पूजा ,जिसे सामग्री पूजा से पहले या बाद में कभी भी किया जा सकता है ,विद्वानों का मन्ना है के जब तक मानस पूजा न की जाये ,सामग्री पूजा का फल नहीं मिलता ,हम मंदिर जाते है भगवान को एक रुपया या पांच रुपया चढ़ा आते है या कोई फल फूल भेंट कर आते है .वस्तुता भगवान को किसी बस्तु की आवश्यकता नहीं वे तो भाव के भूखे है ,संसांर में ऐसा कोई भी पदार्थ उपलब्ध नहीं है जो हम भगवान को भेंट कर सके क्यों के सब कुछ उसी ने तो बनाया है हम उसी की बस्तु उनको भेंट कर रहे है .

यही कारन है शाष्त्रो में मानस पूजा का विशेष महत्व माना गया है ,मानस भगति से अगर एक फूल भी चढ़ा दिया जाये तो वो बाहरी करोड़ो फूलों के बराबर माना जाता है .इसी तरह आप मानस पूजा से धुप दीप फल फूल नैवेद्ये चढ़ा सकते है  .

मानस पूजा कैसे करते हैं

मानस पूजा के लिए भगत पहले स्वच्छ आसन बिछा कर उस पर बैठ जाये अपनी आंखे बंद कर के अपने इष्ट का ध्यान करते हुए कल्पना करे के उसका इष्ट रत्नो से सुसज्जित स्वर्ण आसान पर बिराजमान है .

,भगत मानस पूजा में सवर्ग लोक की मंदाकिनी गंगा के जल से अपने अराध्ये का स्नान कराये ,सिर्फ मन की गहराई से सोचना है , कामधेनु गाओ के दूधसे पंचामृत त्यार करके प्रभु का पूजन करे .

स्वर्ग लोक के दिव्ये फूलों से प्रभु अभिनन्दन करे , मन से बायु रूपी धुप और अग्नि रूपी दीप से भगवान की स्तुति करे ,इसके साथ अपने तन मन और धन को भी प्रभु चरणों में समर्पित करता रहे ,
अब कुछ समय तक उसी आसन में बैठे हुए अपने इष्ट के ध्यान में मगन रहे बाहर का सब भूल जाएं ,बस आप है और आपका प्रभु , यही है मानस   पूजा.

 मानस पूजा के लाभ 

मानस पूजा में जितना समय बयतीत होता है उतने समय तक एक उपासक भगवान के समीप रहता है ,संपर्क में रहता है .और तब तक वो संस्रार से भी दूर रहता है ,भगत और ईश्वर के दरम्यान तीसरा कोई नहीं होता .साधक जितना अधिक समय तक मानस पूजा करता है उतना समय  अंतर्जगत में बीतता है




मानस पूजा से साधक के अंदर दिव्य ऊर्जा का प्राकट्य होता है ,उसका अंतर्जगत प्रकाशमान होने लगता है ,साधक को अलौकिक अनुभूतियाँ होने लगती है ,इस तरह मानस पूजा से साधक समाधि की और अग्रसर हो जाता है .

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