भ्रष्टाचार कैसे ख़तम किया जाये – How to get rid of corruption

भ्रष्टाचार कैसे ख़तम किया जाये – How to get rid of corruption





भ्रष्टाचार कैसे ख़तम करें – How to get rid of corruption ये बहुत पिछड़ा सवाल है जिसका हल आज तक कोई न निकाल सका और जो मार्ग बता गए उस मार्ग पर कोई चलने को त्यार नहीं  जब भी भ्रष्टाचार की बात आती है तो हमारी सोच अपने आप सरकार और सरकारी दफ्तरों में बैठे लोगों की तरफ चली जाती , और ये बात काफी हद तक सत्य भी है ,ये कोई नयी आइटम नहीं है सदिओं पुराने किस्से सुनने को मिल जाते है सुनने को जुर्म और लालच किस तरह इंसान पर हावी होता है .भ्रष्टाचार कैसे ख़तम




 

कई विकसित देश भी इसकी चपेट में है ,रूस  जैसे बड़े देश भी इसको जड़ से ख़तम न कर पाए.एक ख़ुशी की बात ये है के भारत में उतना भ्रष्टाचार है नहीं जितना दिखाया जाता है , हाँ यहाँ की नौकरशाही कामचोर और बद्तमीज़ जरूर हो सकती है , रैंकर के आंकड़ों के अनुसार भारत भर्ष्टाचार में 96 पायदान पर है ,96 ही सही लेकिन भर्ष्टाचार तो है ,

कुछ दसक पहले ये बात सुनने में आती थी के सरकारी नौकरी करने वालो की सैलरी कम होती है इस लिए भ्र्ष्टाचार करते है ,लेकिन आज ,आज तो उनकी सैलरी में कोई कमी नहीं फिर क्यों .कई बार हम न्यूज़ चॅनेल में सुनते देखते है के एक बहुत ऊँचे ओहदे पर बैठा अफसर आज जेल की सलाखों के पीछे है .

 

भ्रष्टाचार और इसकी परिभाषा 

रिश्वत लेना भ्रष्टाचार कहलाता है लेकिन भ्रष्टाचार का अर्थ है जिसका आचरण भ्रष्ट हो , जो ईमानदार नहीं है, लोगों को ठगना धोखा देना. अपनी पावर का दुरूपयोग करना भी भ्रष्टाचार है ,

एक दूध बाला दूध में पानी नहीं ,वो जमाना गया जब लोग दूध में पानी मिलाते थे ,अब तो किसी पाउडर में पानी मिला कर नकली दूध त्यार कर दिया जाता है .फिर भी बिक रहा है .
मिठाई में नकली खोआ

कम तोलना ,

नकली दवाइओं का ब्यापार ,

लौ क्वालिटी के प्रोडक्ट बनाकर ऊँचे दाम में बेचना .

स्कूल में एडमिशन के नाम पर डोनेशन अब देखो रिश्बत को donation नाम दे दिया . इस पड़े लिखे लोगों ने .
व्यापारिओं की बात मत करो ,उनकी भी मज़बूरी है .अगर न करे तो बच्चो का पेट कैसे भरे

अब बात चली है तो एक मजेदार बात ये है के भारत जैसा 135 करोड़ की आवादी बाले देश में एक भी बिज़नेस मैन ऐसा नहीं है जो ढंग का ब्लेड बना सके .सुबह सुबह दाड़ी बनाने के लिए अमेरिका की गिल्लेट की तरफ देखना पड़ता है ,कभी इंडिया में बने बलेड से दाड़ी कर के देखना ऐसा लगता है जैसे किसी ने खाल उधेड़ दी हो,

मेरी नज़र में जो लोग घटिया क्वालिटी का सामान बनाते है वो ज्यादा भ्रष्टाचारी है. आपका क्या कहना है .आप जितने भी पैसे खरच कर लो आपको वो क्वालिटी नहीं मिलेगी जिसकी आप उपेक्षा करते हैं,सारा दोष नौकरशाही पर दाल देना के सिर्फ वही भ्र्ष्टाचारी है ये सरासर न इंसाफ़ी है .

एक बार मैं न्यूज़ में देख रहा था उसमे किसी देश के बारे में बताया गया अगर वहां कोई वियक्ति अपनी दुकान खुली छोड़ कर चला भी जाये तो ,ग्राहक खुद सामान लेकर उसकी सही कीमत वहां रख कर चले जाते है .भारत में तो ये कल्पना लगती है .कभी प्रैक्टिकल कर के मत देख लेना .मेरे कहने का ये मतलब नहीं है सभी भ्रष्ट हो चुके है ,इनकी संख्या बहुत कम ,यही कोई लाखो में गिनती हो सकती है ,



पिछले दशक में जो घोटाले हुए है उन्ही लोगों ने किये है ,हमने जिनको अपना नुमाइंदा बनाकर गद्दी पर बैठाया ,फिर नौकरशाही और नेताओं ने मिल कर ऐसा देश को लूटा आम जनता सस्ते आटे दाल के में फसी रही .ऐसा नहीं है भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोई कानून नहीं है , संसद में बिल पास होते रहते है .,अब किसी सरकार ने एक कानून बनाया , रिश्वत लेना और देना दोनों जुर्म है दोनों को सजा हो सकती है . अब करो कंप्लेंट .

एक दिन मै अपना मोटर साइकिल लेकर दवाई लेने गया रास्ते में पुलिस वाले ने नाका लगा दिया ,बिना हलमेट का चालान कटवाता या पैसे देकर रफा दफा करवाता , वो खुद बोला 300 रूपये दो और जाओ ,हमारी जान बची वर्ना कौन सरकारी दफ्तरों में चक्र लगाता और जो पूरा दिन लाइन में खड़ा रहना पड़ता वो अलग .

शायद आप जानते नहीं है के पुलिस वाले हेलमेट और इन्स्योरेन्स का चालान क्यों काटते है ,ये भी एक भ्रष्टाचार है ,हम सोचते है के सरकार और पुलिस वाले हमारा भला चाहते है इसलिए हेलमेट और इन्शुरेंसका कानून है लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है .

How to get rid of corruption

सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं हो सकता , जब कोई नया कानून बनाया जाता है तो जान बूझ कर उसमे एक बहुत बारीक़ छेद रख दिया जाता है .जिसका आम जनता को पता भी नहीं चलता ,जिसका फायदा उठा कर बड़े बड़े भ्रष्टाचारी बच निकलते है ,

भ्रष्टाचार वही लोग करते है जो परमात्मा पर विश्वास नहीं करते , आत्मा परमात्मा ,पुनर्जन्म ,मृत्यु के बाद जनम ,कर्मो का फल इन सब को मूर्खो की कल्पना मानते है वही लोग भ्रष्टाचारी बन सकते है .वो सोचते है ,अगला जन्म किसने देखा ,जितना माल कमा सकते है कमा लो ,

जिन लोगों को पता है हम जितना भी भ्रष्टाचार कर ले हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता , कोई बहुत बड़ा घोटाला करना किसी एक वियक्ति का काम तो है नहीं कई सारे लोग मिल कर इस को अंजाम देते है ,ऊपर से निचे तक एक कड़ी बन जाती है ,नेता से लेकर सबसे निचे के सरकारी कर्मचारी तक ऐसी मजबूत कड़ी बन जाती है ,जिसको भेदना आसान नहीं ,

अब आप समझ गए होंगे सुधार की आवश्कता कहा से है अगर बीमारी सर में है तो पैरो का इलाज नहीं किया जा सकता , भ्रष्टाचार की बीमारी सर में है .सबसे ऊपर जो बैठे है उनसे शुरू होती है ,सजा मिलती है सबसे निचे के कर्मचारी को ,

, जब से मोदी सरकार आयी है, तब से काफी हद तक सुधार हो चूका है ,कई अच्छे कानून पास किये है ,gst और नोटेबंदी जैसे कई कड़े कदम भी उठाये है .,लेकिन अभी और बहुत कुछ करना बाकि है ,हम तो ईश्वर से यही प्रार्थना करते है के भगवान इनकी उम्र लम्बी करे और वर्षो तक हमारे देश का मार्गदर्शन करते रहे .



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