भारतीय नारी का जीवन और उसकी चुनौतियां -indian women

भारतीय नारी का जीवन और उसकी चुनौतियां -indian women





भारतीय नारी का जीवन और उसकी चुनौतियां , भारतीय नारी का जीवन बहुत संघर्षपूर्ण और भय के साए में बीतता है ,एक जमाना था जब भारत में नारिओं का बहुत सम्मान और आदर हुआ करता था ,करीब 1200 वर्ष पहले की बात है , उस समय नारी को देवी का रूप माना जाता था शृष्टि का निर्माण करती है ,वैदिक काल में नारी को पूर्ण सवतंत्रता थी ,हर बड़े युद्ध में या निर्णय में नारी के फैंसले का सम्मान हुआ करता था ,उस समय पुत्र या पुत्री में ज्यादा भेद भाव नहीं था पुत्र के आभाव में पुत्री को ही वारिस घोषित किया जाता था .पुत्री ही साम्राज्य की उतरा अधिकारी हुआ करती थी ,उस समय भारत में न तो सती प्रथा थी और नहीं पर्दा और न ही नारी का शोषण होता था .

भारतीय नारी का जीवन और उसकी चुनौतियां -indian women life

भारतीय नारी का जीवन



मुग़लों के समय शुरू हुआ नारी शोषण

समय बीतता गया कलियुग ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया कई विदेशी मुग़ल लुटेरे भारत में आए जिन्होंने भारतीय नारी की वो दुर्दशा की जिसको सुन कर पथर भी रोने लगे .लेकिन  उन राक्षशों को ये अपने धर्म के अनुकूल लगता था .यवनो के चरित्र हीनता के व्यवहार ने भारतीय नारी को सबला से अबला बना दिया .मुग़ल बादशाहों के दुष्ट चरित्र का वख्यान सुन के आप के रोंगटे खड़े हो जाने है इसलिए ये बात फिर कभी दूसरी पोस्ट में शेयर करूँगा .

नारी को मिला गौरव और सम्मान

समय ने अपनी करवट ली एक बार फिर से भारत यवनो और मुग़लों की गुलामी से बाहर आया ,नारी को फिर से सम्मान मिलने लगा , सती प्रथा, बाल विवाह , पर्दा ,कन्या बध जैसी बुराइओं को ख़तम कर दिया गया .भारत में नारी शक्ति का परचम लहराने लगा , सरोजनी नैयेडु ,विजय लक्ष्मी पंडित,कमला नेहरू ,इंदिरा गाँधी , जैसी महान हस्तियां भारत में पैदा हुईं जिन्होंने भारत नाम पूरी दुनिया में रोशन किया .

सवतंत्रता के बाद भारतीय नारी की स्थिति में सुधार

सवतंत्रता के बाद भारत में नारी और पुरुष को समान अधिकार मिले सबिधान ने लिंग भेद समाप्त कर दिया ,नारी पर लगे सभी प्रतिबन्ध हटा दिए गए ,अब नारी ने अपनी शक्ति दिखाना शुरू किया ,सामजिक और राजनैतिक दोनों क्षेत्रों में अपना और देश का नाम रोशन किया .श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित को कोण नहीं जनता जो पहली महिला राजयपाल थी ,उत्तर प्रदेश की पहली मुख्य मंत्री भी महिला थी .इस समय बहरतीय नारी देश विदेश में प्रमुख उत्तरदायित्व निभा रही हैं,

आधुनिक भारतीय नारी का जीवन

लेकिन आज भारत में नारिओं की स्थिति देखें तो कोई ख़ास अंतर् दिखाई नहीं देता , गिनी चुनी महिलाएं ही शिखर तक पहुंची है, गांव और दूरदराज के क्षेत्र पिछड़े इलाकों और पिछड़े वर्ग में आज भी नारिओं को उनका वो सम्मान नहीं मिला जो उनको मिलना चाहिए था , देह व्यापार और ब्लातकार जैसी कुरीतियां अब और ज्यादा मजबूती से फ़ैल रही है .



शहरों में महिलाओं की स्थिति

शहरों में तो ये दुर्दशा हो गयी है के कोई नारी अकेली बाहर तो क्या घर में भी सुरक्षित नहीं है .हर समय उसके मन में यही डर रहता है के न जाने कब क्या हो जाये ,इन सब को रोकने के क़ानून तो बहुत है ,लेकिन व्यवहार में नहीं लाया जाता ,अगर कही कोई गुनाह होता भी है तो उसको छुपाने की कोशिश की जाती है कानून बनाने बालों की तरफ से ,किसी के ऊपर तेजाब से हमला किसी को जिन्दा जला दिया गया , किसी का शोषण करने के बाद कतल कर दिया गया ,लेकिन क़ानून सिर्फ किताबों में होता है.

जैसे जैसे महिला सुरक्षा के नए कानून बन रहे है महिला अत्याचार की खबरे भी उतनी ही जयदा बढ़ रही है भारतीय महिला के सामने अब चुनौतियां और भी ज्यादा है ,सुरक्षा और आत्म सम्मान की चुनौती स्व- रोजगार की चुनौती , इन सब चुनौतिओं से उसको खुद पार करना है ,

 




सबसे पहला कदम काल्पनिक स्वप्नों की दुनिया से निकल कर अपने भवष्यि को सवारना होगा अर्थात स्वरोजगर से आत्म निर्भर बनाना होगा ,दूसरा कदम अपनी आवाज़ को दबाये बिना खुल कर विरोध करे जो गलत है उसको सबके सामने लाये ,तीसरा जो सबसे बड़ा कदम है अपने आदर्शों में बदलाव करे पारम्परिक आदर्शो को अपने जीवन में लाये और उन आदर्शों की स्थापना करे जो उसके सम्मान में वृदि करें .

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