निर्जला एकादशी पूजा विधि और महत्व – 24 एकाद्शीओं में सबसे श्रेष्ठ

By | June 23, 2018

निर्जला एकादशी पूजा विधि और महत्व – 24 एकाद्शीओं में सबसे श्रेष्ठ

निर्जला एकादशी 24एकदाशिओं से अधिक पुण्य फल दायक है

निर्जला एकादशी में भगवन विष्णु की पूजा की जाती है

जो लोग सभी एकाद्शीओं का व्रत नहीं रख पाते उनके लिए निर्जला एकादशी श्रेष्ठ है

मल मॉस की अधिकता के कारन इस वर्ष 26 एकादशियाँ आएंगी

निर्जला एकादशी प्रारंभ: 23 जून 2018 निर्जला एकादशी समाप्‍त: 24 जून 2018

व्रत पारण का समय 24 जून को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट से शाम 04 बजकर 32 मिनट तक.

 

निर्जला एकादशी पूजा विधि :- 

एकादशी तिथि के सूर्योदय से आरम्भ द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक निर्जला एकादशी व्रत किया जाता है , निराहार या फलाहार रहकर भगति और श्रद्धा पूर्वक भगवन विष्णु का पूजन किया जाता है ,नारदपुराण की कथा अनुसार एकादशी का व्रत भगवान विष्णु कोअति प्रिय है ,सात नदिओं का जल लेकर उससे सुबह सवेरे स्नान करें ,स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु के सम्मुख संकल्प करें

भगवान विष्णु की तस्वीर पर द्रुवा से गंगाजल के छींटे दें और रोली-अक्षत से तिलक लगाएं और सफेद कमल के फूल चढ़ाएं  घी का दीपक जलाकर आरती की थाली सजाएं जाने-अनजाने जो भी पाप हुए हैं उससे मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना करें और उनकी आरती भी उतारें उसके बाद वासुदेव का ध्यान और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें.

प्यासे को पानी पिलाना मीठे जल की शबील या प्यायू लगाना चाहिए अगले दिन किसी गरीब ब्राहम्ण को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें.

व्रत रखने वालों को अधिक से अधिक दान देना चाहिए कोई भी आपके दुवार से खाली न जाये , घड़ा , पंखा ,सफ़ेद कपडे, छाता चप्पलें जूते आड़ किस योग को दान देना चाहिए या मंदिर में चढ़ा देना चाहिए ,सबसे जरुरी है जिसको भी ये वस्तुएं दान करें उसको भोजन करवाएं और उसके बाद दक्षिणा जरूर दें। मन ही ,मन भगवन विष्णु से अपने पितरों की मुक्ति की कामना करें , और अपने लिए मन वांछित फल की इच्छा करें ॐ .

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