दिल जीतना हो तो  मीठी बोली बोले .

दिल जीतना हो तो मीठी बोली बोले .




mithi bani kaise bole  दिल जीतना हो तो मीठी बोली बोले . आज की बेटी कल की पत्नी माँ हो सकती है ,कहते है बेटी जब शादी के के बाद अपने पति के घर जाती है तो वो अपने दो कर्मो से ससुराल बालों का दिल जीत सकती है एक मथुर बानी दूसरा स्वादिष्ट भोजन ,mithi bani kaise bole

अपनी माथुर बानी से हम दुश्मन का दिल भी जीत सकते है ये कहाँ तक सही है , अगर कोई ठान ले के दुश्मनी निभानी है तो फिर उस से जितना भी मीठा बोलो वो कभी सुधरने वाला नहीं .लेकिन हमें अपनी तरफ से कोशिश जारी रखनी चाहिए .

चाहे स्त्री हो या पुरुष अगर वो अपनी जिंदगी में सक्सेस होना चाहता है , उसको अपने वियक्तित्व में सुधार और बानी में मथुरता लाना जरुरी है .किसी संत ने सही कहा है
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय॥

लेकिन अगर समाज में देखा जाये तो ,हम कभी अपने अहंकार को या क्रोध को पुष्ट करने के लिए दुसरो को अपने कटु शब्दों से भेदते रहते है .कई लोग कटु बचन बोल के दूसरों का दिल दुखा के खुद को अच्छा और महान साबित करना चाहते ,

ईश्वर ने हमें अच्छे कर्म करने के लिए धरती पर भेजा है ,जैसा कर्म हम करते है ईश्वर हमे वैसा फल देगा .अगर हम अपनी बानी से किसी का दिल दुखाते है तो ये हमारी जीत नहीं हो सकती ,

आज आपने किसी का दिल दुखाया कल को कोई तीसरा आप को कटु बचन सुना देगा .ये प्रकृति का नियम है ,हर कर्म का फल मिलता है .

मथुर भाषा एक ऐसी कुंजी है जिसके द्वारा सामने वाला आपके विचारो और वियक्तित्व का अनुमान लगता है .अगर आप एक व्यापारी है आपके कस्टमर से आप किस तरह बात करते है ,कटु बचन सुन के कोई भी आपकी शॉप में नहीं आएगा .




अगर आप इंटरवीउ के लिए जाते है तो किस तरह बात करे ,या किसी से कोई काम निकालना है तो विशेष कर अपनी बानी को सयम में रखे , सामने बाले को ये न लगे के मीठा बोलने का सिर्फ दिखावा किया जा रहा है अपनी प्रकृति ऐसी बना ले , आपके मुँह से जो भी शब्द निकले , मोहन मन्त्र की तरह काम करे .

मधुर वाणी बोलने से तात्पर्य यह नही है कि मन में द्वेष भाव रखते हुए मीठी वाणी का प्रयोग किया जाए।  जीवन का लक्ष्य तो मन की कटुता को दूर करना है ,

पाती पत्नी के रिश्ते में कई बार बाक युद्ध इतना बढ़ जाता है दोनों तरफ से कटु बचनों की वारिश होने लगती है अगर दोनों में से एक भी मथुर भाषी हो तो रिश्ता टूटने से बच सकता है , अन्यथा परिणाम आपको पता है .

सोशल मीडिया में न चाह कर भी हम ऐसी प्रतियोगिता में शामिल कर दिए जाते है जहा सिर्फ और सिर्फ कटु बचनों का आदान प्रदान होता है , परिणाम आखिर में कुछ नहीं निकलता ,

चाहे कोई भी क्षेत्र हो हमें अपने शब्दों पर लगाम लानी सीख लेनी चाहिए ,किसी ने एक शब्द कह दिया तो ,बौछार न कर दे अपनी बानी से ,हो सकता है के आप जीत भी जाओ .लेकिन वैज्ञानिक तोर पर आप बहुत कुछ खो चुके होते है.

आखिर में यही कहना चाहूंगा के आपने क्रोध , द्वेष और अहंकार को खुद पर हावी न होने दे ,मथुर बोले दुसरो को सुख दे इसी में सच्चा सुख है ,ईश्वर कही बाहर नहीं हर एक वियक्ति के भीतर है ,अगर आप किसी का दिल दुखते है तो आप ईश्वर का दिल दुखा रहे होते है




 

 

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