गणेश जी की भगति कैसे करे – ganesh ji ki  bhagti kaise kare

गणेश जी की भगति कैसे करे – ganesh ji ki bhagti kaise kare




गणेश जी की भगति कैसे करे ganesh ji ki bhagti kaise kare भगवान गणेश जी को विघ्नविनाशक भी कहा जाता है ,जीवन में किसी भी प्रकार की रूकावट समस्या या विघ्न आए तो गणेश जी की शरण में आ जाना चाहिए , तेतीस करोड़ देवी देवताओं में भगवान गणेश जी को सबसे ऊँचा स्थान प्राप्त है ,ज्ञानी जनो का कहना है  जब तक विनायक जी की पूजा नहीं होती तब तक तक कोई भी शुभ कार्य सम्पन नहीं हो सकता है ,इसके पीछे रहस्य ये है के अगर कोई शुभ कार्य करने जा रहे है तो भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना कर लेनी चाहिए इस से कार्य में किसीभी प्रकार का विघ्न नहीं आता और गणेश जी खुद कार्य को सम्पूर्णता से सम्पन करवाते है ,

गणेश जी की भगति कैसे करे
ganesh ji ki bhagti kaise kare



गणेश जी की पूजा कैसे करे :-

त्वं ब्रह्म त्वं विष्णु त्वं रूद्र

गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया है त्वं ब्रह्म त्वं विष्णु त्वं रूद्र अर्थात हे भगवान सीधी विनायक आप ही परब्रह्म परमेश्वर हो आप ही विष्णु हो और आप ही रूद्र हो .तो फिर क्यों न अपने हर प्रकार के कष्टों से छुटकारा पाने के लिए के लिए प्रभु के सामने झोली फैलाई जाये

गणेश जी की भगति किसको करनी चाहिए

अगर जन्मपत्री में कोई अशुभ गृह संकेत करे तो भी गणेश जी की भगति करनी चाहिए ,व्यापर में रुकावट ,शिक्षा में कमी , ज्ञान उपार्जन के लिए ,कार्य में रुकावट बनते कार्य बिगड़ जाना ,दाम्पत्य जीवन में सुख की कमी ,शत्रुओं का डर ,भगवान जी को बुध का करक मन जाता है.

गणेश जी की भगति कैसे करे

भगवान आशुतोष जी की तरह भगवान गणेश भी बहुत जल्दी अपने भगतो की मनोकामना पूर्ण करते है .जब भगवान राम चंद्र जी का विवाह हुआ था तो उन्होंने भी पहले गणेश जी की बंदना की थी उसके बाद विवाह कार्य सम्पन किया था .उनकी पूजा करने से तत्क्षण सभी विघ्न वाधाएँ ख़तम हो जाती है उनके जैसा कृपालु और दयालु कोई नहीं है .

भगतों के मन में अक्सर प्रसन उठता है भगवान गणेश जी कको प्रसन कैसे करे ,कैसे करे उनकी भगति ,किस तरह उनसे कृपा प्राप्त करें ,शास्त्रों में भगति की कई विधिया बताई गयी है.आचार्य ज्ञानेश जी ने जो विधिया बताई थी वो आज हम आपको बताने जा रहे है ,

किसी भी बुधवार को या गणेश चतुर्थी की सभा जल्दी उठ के स्नान आदि से पवित्र होकर गणेश जी का आसान लगावें और अपने लिए भी आरामदायक आसान लगावें जिस पर बैठ कार आप विनायक जी का ध्यान लगा सको.



विनायक जी का भोग :-

गणेश जी की आरती की थाली सजाते समय उसमे तांवे की गढवी में जल भर कर रखें धूप दीप नवैधय फल फूल अगरवती ,सुगन्धित अगर तगर , रखें तांवे की गढवी में जल भरते समय उस में द्रुवा जरूर रखें गणेश अथर्वशीर्ष में कहा गया है की जो भी भगत ध्रुवांकुर से गणेश जी की भगति करता है उसकी तिजोरी में कुबेर का खजाना भरने ागता है अर्थात उसके पास धन सम्पदा की कोई कमी नहीं रही.

सिद्धि विनायक जिको प्रश्न करने के लिए मोदक और शुद्ध घी जरूर रखें ,घी का माहात्म्य ये बताया गया है की भगवान गणेश जी की भगति घी से करने पर बौद्धिक का स्तर बहुत ऊँचा हो जाता है ज्ञान के द्धार खुलने लगते है जिस से व्यक्ति सिर्फ अपने ज्ञान की ऊर्जा से सब कुछ प्राप्त कर लेता है.

दरिद्रता और शत्रु से छुटकारा पाने के लिए ऐसे करे भगति ;-

सफ़ेद चन्दन की माला से गणेश जी के बीज मन्त्र ॐ गण गणपत्ये नमः का एक माला जाप करें उसके बाद प्रभु को मोदक और घीसे भोग लागर कर निचे दिए गए मंत्र को ग्यारा वार पढें

‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।’

इन वैदिक मन्त्र में भगवान् गणेश जी के बारहा नामों का उच्चारण किया जाता है इसके प्रभाव से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है ,घर में खुश हाली और धन सम्पति में वृद्धि होने लगती है.



सार :-

भाईओ बहनो भगवान गणेश जी को पारब्रम्ह परमेश्वर ही जानो उनकी भगति करने से तेतीस करोड़ देवताओं का आशीर्वाद वरसने लगता है ,अगर कोई देवता या ग्रह रुष्ट हो गया हो तो भी उनकी भगति करने से देवता और ग्रह अपना बुरा प्रभाव नहीं दिखाते श्रुति भी कहती है एकं सद विप्रा बहुधा वदन्ति ,अर्थात वे परब्रह्म परमेश्वर एक है परन्तु उनकी कई रूपों में वंदना होती है. गणेश जी की भगति के और फल हम अपने अगले संस्करण में प्रकाशित करेंगे ,बने रहिये पयागा .कॉम के साथ जैसे श्री गणेश

 

 

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