क्या भगवान होते है  ईश्वर कौन है और कैसा है

क्या भगवान होते है ईश्वर कौन है और कैसा है





क्या भगवान होते है ईश्वर कौन है और कैसा है , ऐसे कई सवाल प्रतेक व्यक्ति के मन में बुलबुलों की तरह निकलते है फिर शांत हो जाते हैं ,इस चर्चा को शुरू करने से पहले कुछ इधर उधर की बातें करते है ,सारी दुनिया में 91 प्रतिशत लोग ईश्वर को मानते है ,कभी कभी उनके मन में भी ये सवाल जरूर आता है क्या ईश्वर है या नहीं हम यु ही तो किसी भेड़ चाल का शिकार तो नहीं हो गए,जो लोग ईश्वर को नहीं मानते उनके मन में भी ये बात आती है कोई न कोई तो है जो सब चला रहा है .

क्या भगवान होते है




एक बार एक नास्तिक बीमार हो गया हॉस्पिटल में एडमिट ओह गॉड हेल्प मी ,उसकी पत्नी पास में खड़ी बोली आप तो नास्तिक थे अब ईश्वर को क्यों बुला रहे है,ऐसा नहीं है जो नास्तिक हैं वो ईश्वर को नहीं मानते ईश्वर का डर उनको ज्यादा होता है ,असल में वही सच्चे श्रद्धालु होते है , क्यों , क्यों के वो अंधविश्वासी नहीं होते ,वो किसी की देखा देखी नहीं करते आडम्बर नहीं करते ,जो प्रत्यक्ष है उसी पर विश्वास करते है ,


जो लोग भगत हैं ,जो मानते है उनका कहना है के ईश्वर कण कण में है , कुछ लोगों का कहना है के ईश्वर सब में है . वही दूसरी और कई लोग मानते है के सब कुछ ईश्वर का है .कुछ लोग कहते हैं के ईश्वर एक है ,सब एक हैं ,लेकिन कई लोग अलग-अलग ईश्वर की पूजा करतें हैं .असल में सच हैं क्या ,


एक बार एक श्रद्धालु मिला तो उसने अपना प्रवचन शुरू किया ,या यु कह ले के मै ही उनके वचन सुनने गया था ,उन्होंने बताया के राम, कृष्ण , विष्णु , सभी भगवान एक हैं ,प्रवचन ख़तम होने के बाद मैंने उनसे सवाल किया के आप कहते हैं के सभी भगवान् एक हैं , तो फिर जब माता सती ने सीता का रूप धारण किया था शिव ने उनको मन से क्यों त्याग दिया था ,क्या शिव भगवान को नहीं पता था हम सब एक हैं ,वो ज्ञानी आग बबूला हो गया उसने कहा तुम बात को समझे नहीं.मेरे कहने का मतलब के ईश्वर सब में हैं ,मैंने ज्यादा बहस करना उचित न समझा ,बात बहीं ख़तम कर दी अपनी हार स्वीकार करते हुए बापिस आ गया


अगर आप भी मानते हैं के ईश्वर एक हैं तो एक उदाहरण , जब आपको प्यास लगती हैं तो आप पानी पीते हैं ,कोल्ड ड्रिंक पीतें हैं ,आप सिर्फ पानी मांगते हैं , लेकिन अगर आपको पानी की जगह उबली दाल दे दी जाये तो ,क्या उसमे पानी नहीं ,नहीं आपको सिर्फ पानी चाहिए ,


अब दूध की उदारण लेते हैं , बर्फी, दही, माखन, रबड़ी,घी , लस्सी, खोया ये सब दूध से बना हैं ,लेकिन सबका स्वाद अलग अलग हैं .अगर कोई कहे के ये सब एक हैं तो , तो आप नहीं मानोगे ,आप को पता हैं ये सब अलग अलग चीजे हैं , इनका रूप रंग स्वाद सब अलग हैं .क्या आपने कभी वर्फी को दूध कहा हैं नहीं आप नहीं कह सकते इस से आपकी अज्ञानता प्रदर्शित होगी लेकिन इन सब में एक चीज सामान्य हैं वो हैं दूध ,

उसी तरह ये कहना के शिव जी , राम जी , कृष्ण जी ,ब्रह्मा जी ,सब एक हैं तो यहाँ से अज्ञानता ऐसी शुरू होती हैं के जिसका तोड़ कोई नहीं निकाल सका ,लेकिन इन सब में एक बात समान्य हैं वो हैं व्रह्म, सब एक नहीं हैं लेकिन सबमे एक ही शक्ति संचार कर रही हैं वो हैं ब्रह्म ,अधिकतर लोग ब्रह्मा और ब्रह्म में अंतर् नहीं समझते ,


अब ये ब्रह्म क्या हैं , भारतीय धार्मिक ग्रंथों में ब्रह्म को कई नामो से पुकारा गया या सम्बोधित किया गया .ब्रह्म को ईश्वर तत्व भी कहते हैं , गीता में भी लिखा गया है के जो तत्व से जानता हैं वही असली भगत हैं .वही श्री कृष्ण को प्रिये हैं इसका अर्थ ये हुआ के जो तत्व से नहीं जानता वो भगत नहीं हैं , अब आप समझ लो के आप भगत हो या नहीं .
अब एक और सवाल खड़ा गया के ईश्वर तो सुना था ईश्वर तत्व क्या हैं .आप सब जानते हैं के तत्व को इंग्लिश में element कहते हैं .इसका अर्थ ईश्वर एलिमेंट हैं ,हमारे धार्मिक ग्रंथों ने आज के भगतो की सारी भगति पर पानी फेर दिया .






कई वैज्ञानिक दाबा करते हैं हैं के उन्होंने गॉड पार्टिकल की खोज कर ली हैं ,लेकिन वही लोग कहते हैं के नहीं अभी खोज जारी हैं उन्होंने गॉड को एक particale कण समझा हुआ हैं .क्या ईश्वर एक particale हैं एक कण हैं नहीं .. ईश्वर पार्टिकल नहीं हैं वो एक ऐसा तत्व हैं जिसका कोई रूप नहीं आकर नहीं पार्टिकल का तो रूप होता हैं आकार होता हैं .वैज्ञानिक गलत रास्ते में भटके हुए हैं ,


क्रमशः

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