सावन के प्रत्येक सोमवार को पढ़ें ये कथा

By | July 6, 2018



सावन के प्रत्येक सोमवार को पढ़ें ये कथा  सावन सोमवार की अद्भुत कथा और प्राचीन कथा जरूर पढ़ें 30 जुलाई को व्रत शुरू होने जा रहे है ,शिवजी के पूजन से भगतों की धन संबंधी बाधाएं  दूर हो जाती हैं। घर में धन की वर्षा होने लगती है। इस सृष्टि के मालिक भगवन शिव है ,उनकी ही इच्छा से किसी भी व्यक्ति का पतन होता है वही है जो राजा को दर दर की ठोकरे खाने मजबूर कर दें और रंक को राजा बनाकर सिहांसन पर बैंठा दें। डमरू बाले बाबा की लीला अपरम्पार है।

करोड़ पति बनना है तो सावन

करोड़ पति बनना है तो सावन

जिन श्रद्धालुओं पर शिव की कृपा हो जाये तो हो जाते है।  तो उसके बारे न्यारे हो जाते है

प्राचीन कथा

एक प्राचीन कथा के अनुसार एक व्यक्ति बहुत दुखी और दरिद्र था वो अपने सभी दुखों और गरीबी के लिए भगवन शिव को जिम्मेदार मानता था इस लिए वो शिव की भगति करने की बजाए उनसे नफरत करने लगा , और शिव भगवान् को भला बुरा कहने लगा ,





उसके गांव से दो कोस की दुरी पर नदी के पार एक शिव मंदिर था ,वहां एक पुजारी प्रतिदिन पूजा अर्चना करता मंदिर गंगा जल ,धुप अगरवती और फूलों से शिव की आराधना करता ,लेकिन ये व्यक्ति हर रोज उस मंदिर में जाकर कच्चा मांस रख आता था। कहता जो मैं खाता हु वाही तू भी खा। ये सिलसिला कई महीनो तक चलता रहा। पुजारी के लाख समझाने पर भी ये व्यक्ति नहीं माना।

एक बार मूसलाधार वारिश होने लगी ,घर से निकलना मुश्किल हो गया , नदी में तेज बाढ़ आ गयी कोई पुजारी भी पूजा करने ना जा सका , लेकिन ये व्यक्ति अपनी नफरत के कारन घर से निकला , नदी के किनारे पहुँच गया ,उस दिन , नाव वाला भी नहीं था ,इस लिए उसने नदी तैर कर जाने का फैंसला किया।

व्यक्ति नदी तैर कर पार कर गया , जब वो मंदिर के अंदर पहुंचा तो उसको याद आया की वो तो कच्चा मांस लाना भूल गया अब क्या करे ,बापिस जाना बहुत मुश्किल था।

उसने शिवलिंग को  देखा , तो ये क्या शिव लिंग पर दो आंखे दिखाई दी , उनमे से एक आँख से खून निलने लगा ,

व्यक्ति के मन में न जाने क्या आया इसने खंजर निकाला और अपनी आँख निकाल ली। और शिव लिंग में लगाने लगा ,तभी भगवन शिव प्रकट हुए और कहने लगे तुम्हारी भगति से प्रसन हूँ वर मांगों , व्यक्ति बोला मैंने तो कभी आपकी भगति नहीं की , हमेशा आपको भला बुरा कहता था फिर आप मुझसे प्रसन होकर वर क्यों दे रहे है।

शिव बोले पिछले कई महीनो से तुम मुझे याद कर रहे हो दिन रात मुझे याद करते हो सोते उठते जागते सिर्फ मेरा ही ध्यान करते हो ,आज इस मूसलाधार वारिश तुम अपना कर्तव्य निभाने बाढ़ बाली नदी पार कर के आ गए। उस व्यक्ति ने भगवन शिव से अपने पापों की क्षमा मांगी।

भगवन शिव उसे वरदान देकर अंतर् ध्यान हो गए , कुछ ही दिनों में व्यक्ति की सारी गरीबी और दुःख दूर होने लगे ,वो जो भी कार्य को करता उसमे सफलता मिलती। खेती से लेकर व्यापर तक सब में उसे धन लाभ होता गया और एक दिन वो व्यक्ति बहुत बड़ा धनि सेठ बन गया।




भगतो इस कथा से ये सीख मिलती है भगवान् अपने भगतों से कब प्रसन हो जाएँ ये कोई नहीं जानता , दिन रात सोते उठते बैठते खाते पीते डमरू बाले बाबा का ध्यान करते रहें , सुमिरन करते रहें ,एक दिन आप पर भी जरूर कृपा होगी।

सावधानी :- ये प्राचीन कथा सिर्फ पढ़ने के लिए है ,आपने अपने शरीर के किसी अंग को नुक्सान नहीं पहुँचाना,
ये घोर कलियुग है , कोई ऐसी मूर्खता न करें जिससे बाद में पछताना पड़े .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *