अशुभ ग्रहों के  प्रभाव और निवारण के सरल उपाय

अशुभ ग्रहों के प्रभाव और निवारण के सरल उपाय




अशुभ ग्रहों के प्रभाव और निवारण के सरल उपाय ज्योतिष अर्थात ईश्वर ज्योति सवरूप है ,यां ईश्वर की ज्योति मनुष्य के जीवन में ग्रहों का कितना प्रभाव है ये आप वैज्ञानिक दृष्टि से पता लगा सकतें है ,कुछ लोग इसको अंधविस्वाश मानते है और कुछ लोगो का कहना है के नो ग्रहों और सताईस नक्षत्रों से मानव जीवन का भूत भविष्य वर्तमान टिका हुआ है ,अगर ग्रहों की दृष्टि शुभ हो जाये तो व्यक्ति रंक से राजा बन जाता है और अगर ग्रहों ने  कुदृष्टि डाली तो खाक में मिलते देर नहीं लगती .अशुभ ग्रहों के प्रभाव





 

इस ब्रह्माण्ड के शूक्ष्म से शूक्ष्म अणु में भी अपनी ऊर्जा होती है ,गृह तो विशाल पिंड है ,उनकी ऊर्जा भी जरूर होती होगी जिसका आपके व्यक्तित्व पर नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है ,अगर आपका ओरा मजबूत है तो आपके ऊपर किसी बाहरी ऊर्जा का प्रभाव ना होगा अगर आपकी अपनी ऊर्जा कमजोर है तो आप इन ग्रहों और नक्षत्रों की परिधि में आ जाते है जिस से अच्छे और बुरे प्रभाव मिल सकते हैं.आज हम आपको ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव के लक्षण और उनसे बचने के सरल उपाय बताने जा रहे जिनका प्रयोग कर के आप अपने जीवन को सफल बना सकते हो .


अशुभ ग्रहों के प्रभाव और निवारण के सरल उपाय

सूर्य के प्रभाव – :

9 ग्रहों में सबसे पहले सूर्य को रखा गया है क्यों की सूर्य पिता पक्ष , आत्मा समाज में यश, मान, सम्मान, कीर्ति, सरकारी नौकरी प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा का कारक होता है   कुंडली में सूर्य के अशुभ होने पर समाजिक अवनति होती है यश मान में कमी या बदनामी हो सकती है ,पेट, आँख, हृदय का रोग हो सकता है साथ ही सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न होती है, इसकी राशि है सिंह ,

सूर्य के अशुभ प्रभाव के लक्षण -:

लक्षण यह है कि मुँह में थूक ,बलगम या पानी इकट्ठा हो जाना , मन में दुःख या संताप रहता है ,मानसिक परेशानी होती है , पैतृक सम्पति न मिलना ,पिता से विवाद ,झगड़ा या वैचारिक मतभेद सूर्य के पीड़ित होने के सूचक है .

सूर्य के उपाय- :

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने सूर्य के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है ,सूर्य को जल चढ़ाएं अपना ओरा मजबूत करें , गेहूँ, ताँबा, घी, गुड़, लाल कपड़ा, कनेर के फूल, गाय-बछड़ा ,सोना इनमे से कोई वास्तु अपनी योग्यता अनुसार किसी गरीब को दान करें .ॐ रं रवये नमः या ॐ सूर्ये नमः का एक माला जाप रोज करें ,ताम्बे का एक टुकड़ा लेकर उसके दो टुकड़े करें एक बहते जल में बहा दें दूसरा टुकड़ा साडी उम्र अपने साथ रखने से सूर्य के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है .


चंद्र गृह के  प्रभाव -:

चंद्र माता और माता पक्ष का सूचक है ,चद्र्मा का प्रभाव मन पर अधिक होता है ,चन्दर के बुरे प्रभाव के कारन आपकी आय का स्तोत्र बंद हो जाता है ,आपको पानी से खतरा हो सकता है ,आपमें कायरता आ जाती है ,छोटी से बात पर घबराहट और दिल की धड़कने तेज हो जाती है ,स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है . ऎसे लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते है माता को कोई रोग लग सकता है , मामा ,नाना के घर में कुछ अशुभ हो सकता है .व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार आते हैं.

अशुभ चंद्र गृह के लक्षण

.चन्दर दोष किसी न किसी को जरूर लग जाता है ,चंद्र से पीड़ित होने पर जातक के जीवन में मायूसी
छा जाती है धन का आना रुक जाता है ,उसको समझ नहीं अत के ऐसा क्यों हो रहा है ,मानसिक परेशनी और बहम का शिकार हो जाता है .दाम्पत्य जीवन उथल पुथल मच जाती है ,पतिपत्नी में आपसी मत भेद शुरू हो जाते है . घर में नित्य कलहा कलेश रहता है

चंद्र गृह के उपाए -:

चांदी की अंगूठी मोती या स्फटिक की माला धारण कर लेनी चाहिए ,माता से कभी झगड़ा नहीं करना चाहिए अन्यथा व्यापर में घाटा शुरू हो जायेगा .शिव की आराधना से चंद्र का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता ,सोमबार के व्रत रखें ,महामृत्युंजय और शिव कवच का पाठ करना शुभ होता है सभी परेशानिया दूर हो जाती हैं ,

सोमवार को सफ़ेद वास्तु जैसे दही,चीनी, चावल,सफ़ेद वस्त्र, ,दक्षिणा के साथ दान करना और ॐ सोम सोमाय नमः का 108 बार जाप करना श्रेयस्कर होता है जिनका चंद्र कमजोर है उनको दूध गर्म नहीं करना चाहिए ,सफ़ेद वस्तु को गरम न करें .




मंगल के प्रभाव -: 

मंगल बड़े भाई ,रक्त मित्र ,का करक मन जाता है इसकी राशि मेष और वैश्चिक है
मंगल के नकारात्मक प्रभाव से भाई बंधुओं और रिश्तेदारों से झड़गा हो सकता है ,रक्त संबधित कोई रोग लग सकता है ,मंगल सेनापति और जोशीले स्वभाव का होता है ,अगर मंगल अशुभ होगा तो जातक को अकारण क्रोध अधिक आएगा ,ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है शरीर में बार बार चोट लगती रहती है ,दुर्घटना या ऑक्सिडन्ट का खतरा भी हो सकता है ,मंगल की अशुभता के कारन .

 

मंगल के उपाए -:

.मंगल के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी बढ़ का कोई देवता नहीं है  हनुमान जी की आराधना करना,हनुमान जी को केसरी सिन्दूर और चोला अर्पित करना,हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलाना,हनुमान चालीसा,बजरंग बाण,हनुमानाष्टक,सुंदरकांड का पाठ और ॐ अं अंगारकाय नमः का 108 बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है.


बुध के प्रभाव -: 

बुध गृह व्यापार ,बुद्धि और स्वास्थ्य का कारक गृह है ,बुद्धि से सम्बन्ध होने के कारण बाक कला को भी निर्देशित करता है ,बुध अशुभ होने के कारण चार्म रोग , दांतो की समस्या गुपत रोग, भूलने के समस्या ,हो सकती है ,व्यापर नौकरी में विश्वासघात , और सब शिक्षा ज्ञान और जानकारी होने पर भी मूर्खो की श्रेणी में ला देता है

बुध के उपाय :

बुध अशुभ होने पर सभी स्त्रिओं का सम्मान करना चाहिए ख़ास कर बुआ बहन और बेटी को खली हाथ न भेजें खुछ न कुछ दे कर बिदा करें ,घर मे वाद्य यंत्र न रखे ,किसी पक्षी को पिंजरे में न रखें ,इष्ट की मूर्ति घर में न रखें .घर के अंदर मंदिर न बनाये . मासाहार से परहेज छोटी कन्याओं का पूजन करने से बुध के अशुभ प्रभाव कम हो जातें हैं .दुर्गा पूजन करें


 गुरु के प्रभाव -: 

वृहस्पति के अशुभ होने के कारण बाल जल्दी सफ़ेद हो जाते है झड़ने लगते है ,घर आपसी मन मुटाव शुरू हो जाता है ,ए दिन कलेश रहने लगता है ,घर के जेवरात बिकने शुरू हो जातें है ,चोरी और आर्थिक नुक्सान ,अधिक होता है ,आमदनी के स्तोत्र बंद हो जाते हैं ,शिक्षा अधूरी रह सकती है ,यश में कमी और अभद्र भाषा का प्रयोग ये सब गुरु के अशुभ होने पर होता है ,गुरु की रशियन धनु और मीन हैं.

 गुरु के उपाय -:

साधु सन्यासिओं को दान दें और उनका सम्मान करें .गले या कलाई में पीला धागा बांधें ,चने की दाल हल्दी ,प्ले वस्त्र , पिले मीठे व्यंजन का दानकारें ,वीरवार का व्रत रखें ,विष्णु की आराधना शुरू करने से गुरु के बुरे प्रभाव कम हो जातें हैं .


 शुक्र के प्रभाव -:

शुक्र का प्रभाव 12 से 40 वर्ष के बीच अधिक होता है ,शुक्र किशोरावस्था , और जवानी का सूचक है ,ऐशो आराम, विलासिता, मौज मस्ती करना घूमना फिरना ,इज़्ज़त और शोहरत ,सब शुक्र से मिलता है ,अगर आपका शुक्र नकरात्मक प्रभाव डाले तो ,मन में विकार उत्पन हो जाते हैं,मन भटकने लगता है सही गलत का निर्णय करना मुश्किल हो जाता है .विलासिता के कारण धन का नशा होता है ,
शुक्र तुला और वृषभ राशि का स्वामी है

 शुक्र के उपाय -:

शुक्र क्र बुरे प्रभाव से बचने के लिए माँ लक्ष्मी का पूजन करें . खोये से बानी मिधि चिजेबनन दान करें सफ़ेद वस्त्र और दूध गरीब बालकों में बाटने से शुक्र के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं . प्रति दिन शुक्र के बीज मंत्र का जाप करना चाहिए.काम वासना से दूर रहें ,जुआ सट्टा लॉटरी न खेलें , अन्यथा जेल यात्रा हो सकती हैं




 


शनि के प्रभाव -:

कहते है अगर शनि कुपित हो तो अचानक से सब काम धंदे बंद हो जाते है जातक के बुरे दिन शुरू हो जातें है ,अगर शनि कुपित है तो अचानक से घर का कोई हिस्सा टूट जाता है या छत का प्लास्टर टूटने लगता है ,कोई दुर्घटना हो सकती है ,किसी बहन से चोट लग सकती है ,शनि का प्रभाव स्नायु तंत्र पर अधिक होता है .ये दो राशिओं का स्वामी मन जाता है मक्क्ड़ और कुम्भ .सम्पति का विनाश हो जाता है .पालतू जानवर अचानक मर जाये ,अगर आपके जुते खो जाएँ रक्खी हुयी चीज भूल जाएँ तो समझ लें आपका शनि खराब चल रहा है

शनि के उपाय :

शनि के बुरे प्रभाव से बचने का सबसे आसान तरीका हैं शिव की आराधना आडंवर रहित करें . पाखंड न करें . झूठ बोलना बंद कर दें .ठगी .और न करें चरित्रवान बने ,अपना चरित्र संत महत्मा जैसा बना लें तो शनि आपकी हर एक समस्या को ख़तम कर देगा आपको रंक से राजा बना देगा .अन्यथा शनि भीख भी माँगा देता हैं और दर दर की ठोकरे भी खिला देता हैं


राहु के प्रभाव -:

राहु की की चाल खराब होने पर व्यक्ति गलियां निकलने अपशब्द बोलने का आदि होता है ,गलतफहमी , आपसी मन मुटाव ,अहंकार भरी वाणी से बात करना ,टुबरक्युलोसिस का रोग ,नाखुनो के रोग ,पेट में दर्द , आधे सर में दर्द ,शत्रुओं की अधिक संख्या , मानस्कित सतुलन खोना ये सब राहु के कुप्रभाव के कारण होता है .अचानक से कोई समस्या आ जाये .तो समझ लें आपको राहु परेशां कर रहा है ..

राहु के उपाय :

अगर राहु खराव हैं तो घर में जितना क्वाड हैं उसको निकल दें बेचे न घर का क्वाड बेच कर जो धन आता हैं ,उस से राहु के बुरे प्रभाव में वृद्धि होती हैं . गोमेद धारण करे दुर्गा, शिव व हनुमान की आराधना करे तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करे जौ या अनाज को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएँ, कोयले को पानी में बहाएँ, मूली दान में देवें, भंगी को शराब, माँस दान में दें ,सोते समय सर के पास किसी पात्र में जल भर कर रक्खे और सुबह किसी पेड़ में डाल दे,यह प्रयोग 43 दिन करे इसके साथ हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड का पाठ और ॐ रं राहवे नमः का 108 बार नित्य जाप करना लाभकारी होता है .छत पर लकड़ी का क्वाड न रखें .अपने बजन बराबर कोयला जल में बहा दें नील वस्त्र और नीली चीजों से परहेज करें


 केतु के प्रभाव -:

राहु और केतु के प्रभाव एक समान होते है गंठिया और पेशाव समन्धित रोग लग जाएँ तो केतु के कुप्रभाव का पता लगता है .संतान को कष्ट मिलता है या संतान पक्ष से कोई लाभ नहीं होता ,धन और यश का नाश बुद्धि भ्रमित रहती है ,शत्रु परेशान करते हैंहै

 केतु के उपाय :

केतु के उपाय भी राहु के उपाय समान होते हैं लेकिन इनमे दान की वस्तुएं भिन्न होती हैं ,किसी साधु कंबल दान करतें रहने केतु के बुरे प्रभाव कम हो जातें हैं भूरे वस्त्र , चमड़े की चपल ,दान करें कुत्ता पालें ,किसी को अपने मन की बात न बताएं .



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